रक्षा बंधन (राखी) का त्योहार भारत के त्योहार (पर्व) मे एक बहुत ही पुराना त्योहार है। रक्षाबंधन (राखी) यानि रक्षा का बंधन अर्थात एक ऐसा रक्षासूत्र जो भाई को सभी संकट मुसिबतों से उसकी रक्षा करता है। यह त्योहार भाई बहन के बींच स्नेह और प्यार पवित्र रिश्ते का प्रतीक है।
रक्षाबंधन का त्यौहार हमारे भारत देश में क्यों मनाया जाता है ?
रक्षा बंधन हिंदुओं और जैन धर्म का त्यौहार (पर्व) है जोकि हर साल श्रावण मास के पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है ! परंतु रक्षाबंधन का त्यौहार क्यों मनाया जाता है आइए इस निबंध के माध्यम से जानने की कोशिश करते हैं ! दो शब्दों को मिलाकर रक्षाबंधन बनता है जिसका मतलब एक ऐसा बंधन जोकि रक्षा करता हो।
रक्षाबंधन को भाई और बहन के बीच प्यार का प्रतीक माना जाता है। रक्षाबंधन (राखी) भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को दर्शाती है। इस दिन बहनें अपने - अपने भाइयों के मस्तक पर तिलक (टीका) लगाकर उसके दाहिने हाथ हो की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है जिसे हम राखी कहते हैं ! और बहाने भाइयों के लिए खुशी और स्वास्थ्य के लिए भगवान से दुआ (मन्नत )मांगती है।
भाई भी राखी बंधवाने के बदले मैं अपनी अपनी बहनों को इनाम देते हैं। और उसकी रक्षा करने की प्रतिज्ञा करते हैं ! यह त्यौहार भाइयों को याद दिलाता है कि उन्हें अपनी दीदी की सदैव रक्षा करनी है।
भविष्य पुराण के अनुसार जब दैत्य जातियों के राजा राजा बलि ने देवताओं पर आक्रमण किया तो उस समय देवताओं के राजा इंद्र को काफी क्षति हुई इंद्र की पत्नी
शची से देवताओं की स्थिति देखी ना गई और फिर वह भगवान विष्णु जी के पास सहायता के लिए चली गई तब भगवान विष्णु जी ने शची को एक धागा देकर कहा कि वह इस धागे को अपने पति देवराज इंद्र के कलाई पर बांधे ऐसा करने के बाद राजा बलि की हार और देवराज इंद्र की जीत हुई । उसी समय से सभी पत्नियां
और बहने युद्ध में जाने से पहले अपने अपने पति और अपने भाइयों को हाथ में रक्षा सूत्र बांधती थी जिसे आज हम राखी कहते हैं!

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