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जैव प्रौद्योगिकी का कृषि में भूमिका (Role of biotechnology in agriculture) पर प्रकाश डालें। (10+2)


Ans. जैव प्रौद्योगिकी का कृषि में भूमिका निम्नलिखित है :• 

संक्रमण रहित पौधे : - मेरिस्टेम संवर्द्धन थर्मोथरैपी के साथ रोग रहित फसलों के उत्पादन हेतु किया गया है।•

 जीन का स्थानांतरण : - जीन अभियांत्रिकी का सफलतापूर्वक प्रयोग पौधों में कीट, विषाणुओं एवं शाकनाशकों के प्रतिरोध हेतु तथा संग्रहित प्रोटीन में सुधार हेतु जीनों के स्थानांतरण द्वारा किया गया है। 

इस प्रक्रिया में एग्रोबैक्टीरियम का टी० आई० प्लाज्मीड् उपयोग में लाया जाता है और इसकी मदद से जीन स्थानांतरित होता है।

सोमैक्लोनल विभिन्नता : -सोमैक्लोनल परिवर्त्त अधिक ऊपज, रोग, ठंढ एवं शाकनाशकों से प्रतिरोध हेतु, धातु अविषाणुता, लवण और अन्य दबावों के लिए प्राप्त किया गया है।

होमोजाइगस लाईन प्राप्त करना :-  यह एक गुणित पौधों में गुणसूत्रों को दूना कर प्राप्त किया गया है। 

चीन में यह चावल और गेहूं के लिए किया गया है।

जर्मप्लाज्म संरक्षण पदार्थों को द्रव नाइट्रोजन में 196° रखकर किया जाता है।

 इस प्रक्रिया का प्रयोग क्लोनली प्रजनित पौधों के संरक्षण हेतु किया जाता है। जैसे—कंद

 • भ्रूण का बचाव :- भ्रूण का संवर्धन जीवित हाइब्रीड प्राप्त करने के लिए किया गया है।• तीव्र क्लोनल गुणन : मेरिस्टेम कल्चर से फलदार पौधे एवं वन के पौधे का गुणन किया जाता है। जैसे-आम, टीक।

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